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15 मौतों के बाद भी चुप सत्ता, अरूण यादव ने कहा – जिम्मेदारों का इस्तीफा जरूरी... जब लोग मर रहे थे, तब सिस्टम कहां था...?

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✍️ संवाददाता: खरगाेन  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

03 जनवरी 2026

खरगाेन

खरगोन (विशाल भमाेरिया) । इन्दौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल पीने से 15 नागरिकों की असमय मृत्यु और 500 से अधिक लोगों के बीमार होने की भयावह घटना पर जहां सत्ता पक्ष चुप्पी साधे नजर आया, वहीं पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरूण यादव पीड़ितों की आवाज बनकर सामने आए। उन्होंने इस घटना को मानव निर्मित त्रासदी बताते हुए न सिर्फ शासन-प्रशासन की जवाबदेही तय की, बल्कि इन्दौर की तथाकथित “मॉडल सिटी” छवि पर भी करारा प्रहार किया।


अरूण यादव ने कहा कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का नतीजा है। वर्षों से स्वच्छता के पुरस्कार बटोरने वाला इन्दौर आज अपने ही नागरिकों को सुरक्षित पानी तक नहीं दे पाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ चमकदार सड़कों और विज्ञापनों से शहर महान नहीं बनता, महान बनता है जनता की सुरक्षा से।


यादव ने सत्ता के सबसे मजबूत किलों पर सीधे सवाल दागे... उन्होंने कहा कि जब इन्दौर से ही मंत्री, महापौर और विधायक आते हैं, तब इतनी बड़ी त्रासदी होना सीधे-सीधे शासन की विफलता है। उन्होंने नैतिक साहस दिखाते हुए महापौर से तत्काल इस्तीफे की मांग की और कहा कि जनता की जान जाने के बाद कुर्सी पर बने रहना अपराध से कम नहीं।
सबसे बड़ा और तीखा सवाल उठाते हुए अरूण यादव ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब जवाबदेही तय करने का समय आता है, तब सत्ता को साहस दिखाना चाहिए, न कि मौन।


अरूण यादव ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच स्थानीय या विभागीय स्तर पर हुई तो सच्चाई दबा दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दोषी चाहे अधिकारी हों, ठेकेदार हों या राजनीतिक संरक्षण पाने वाले लोग - सभी को सजा मिलनी चाहिए।


यादव ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा, बीमारों के लिए निःशुल्क और बेहतर इलाज तथा इन्दौर की जल आपूर्ति व्यवस्था की पूर्ण तकनीकी जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।


इस पूरे घटनाक्रम में अरूण यादव एक ऐसे जननेता के रूप में सामने आए हैं, जिसने सत्ता की चुप्पी के बीच जनता के दर्द को आवाज दी। जब कई लोग हालात की गंभीरता से मुंह मोड़ रहे थे, तब अरूण यादव ने सवाल पूछे, जिम्मेदारी तय की और साफ कहा -  “स्वच्छता के तमगे तब तक खोखले हैं, जब तक नागरिक सुरक्षित नहीं है...”

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