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दस लाख शिवभक्तो ने किये शेषशायी शिव के दर्शन, नागपंचमी पर खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के मंदिर मे आस्था का अम्बार...

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✍️ संवाददाता: Ujjain  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

29 जुलाई 2025

Ujjain

उज्जैन (✍️निरंजन उदीवाल)। वर्ष में एक बार नाग पंचमी के अवसर पर खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के पट 28 जुलाई की रात्रि 12 बजे खोले गए । सर्वप्रथम मंदिर के पट खुलने के बाद श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाडा श्री महाकालेश्वर मंदिर के महंत श्री विनीतगिरी महाराज जी ने विधि-विधान से श्री नागचंद्रेश्वर भगवान का पूजन अर्चन किया । श्री नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा के पूजन के पश्चात श्री नागचंद्रेश्वर की शिव प्रतिमा का पूजन और अभिषेक किया गया । पूजन अर्चन के बाद भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए। वर्ष में एक बार खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए 28 जुलाई 2025 की रात से ही कतार में लगकर श्रद्धालु पट खुलने का इंतजार कर रहे थे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में नागपंचमी के पर्व पर श्री महाकालेश्वर भगवान को चांदी के शेषनाग धारण करवाये गये। कोटितीर्थ कुंड पर श्री आशीष पुजारी द्वारा श्री शेषनाग भगवान के पंचामृत, पूजन-अर्चन-आरती के पश्चात श्री महाकालेश्वर भगवान को भस्मार्ती में चांदी के शेषनाग धारण करवाये गये।

श्री महाकालेश्वर मंदिर के द्वितीय तल पर श्री नागचन्द्रेश्वर भगवान की अपराह्न 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत श्री विनितगिरी जी महाराज द्वारा पूजन किया गया। पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर लगाये जाने वाले ध्वज का पूजन कर नवीन ध्वज लगाया गया। 

श्री महाकालेश्वर की सायं आरती के पश्चात श्री नागचंद्रेश्वर भगवान की पूजन-आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी-पुरोहित द्वारा की गई। पूजन के दौरान भी श्री नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन सतत चालू रहे।

     वर्ष में एक बार खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिये लाखो श्रद्धालु आतुर रहते है और देश विदेश से भगवान के भक्त भक्तिभाव से यहां दर्शन के लिये आते हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की पीआरओ श्रीमती गौरी जोशी से प्राप्त जानकारी अनुसार रात्रि 12.15 से शाम सात बजे तक कुल 07 लाख से अधिक व रात्रि 12 बजे श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट बंद होने तक लगभग  दस लाख श्रद्धालुओं ने भगवान श्री नागचन्द्रेश्वर के दर्शन किए।

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