भाई ही निकला भाई का कातिल… जमीन के झगड़े में टूटा खून का रिश्ता, झाबुआ पुलिस ने किया अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा...
08 जनवरी 2026
झाबुआ
झाबुआ। जहां कभी भाईचारे की मिसालें दी जाती थीं… वहीं अब एक ऐसा कत्ल सामने आया है जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है… जमीन के एक टुकड़े ने दो सगे भाइयों के रिश्ते को इस कदर तोड़ दिया कि मामला सीधे मौत तक जा पहुंचा… 2026 के तीसरे तीन याने 3 जनवरी की रात करीब 9 बजे राणापुर थाना क्षेत्र से सूचना मिली कि दुला मचार की मौत हो गई है… पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की… शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखा… लेकिन हालात की चुप्पी कुछ और ही कहानी कह रही थी…
जांच आगे बढ़ी तो हर कदम पर सवाल खड़े होते गए… शरीर पर मिले संदिग्ध निशान… परिजनों के बदलते बयान… और घटनास्थल की खामोशी… पुलिस ने जब पोस्टमार्टम कराया तो सच सामने आ गया… डॉक्टरों की रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि दुला मचार की मौत प्राकृतिक नहीं थी… उसका गला दबाया गया था… यानी यह मौत नहीं… एक सोचा समझा कत्ल था…
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर थाना राणापुर में हत्या का अपराध दर्ज किया गया… इसके बाद पुलिस की नजर सीधे घर के भीतर घूमने लगी… जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी… शक की सुई एक ही नाम पर टिकती चली गई… हिमता मचार… जो मृतक का सगा भाई था…
जांच में खुलासा हुआ कि दोनों भाइयों के बीच लंबे समय से जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था… घटना वाली रात भी इसी बात पर तीखी कहासुनी हुई थी… गुस्से और लालच ने रिश्तों की सारी हदें पार कर दीं… और उसी रात हिमता मचार ने अपने ही भाई दुला मचार का गला दबाकर उसकी सांसें हमेशा के लिए रोक दीं…
सुबह होते होते यह कत्ल एक रहस्यमयी मौत में बदल दिया गया… लेकिन झाबुआ पुलिस के लिए यह अंधा कत्ल साबित नहीं हुआ… पुलिस ने हालात को जोड़ा… बयानों की परतें खोलीं… और आखिरकार आरोपी तक पहुंच गई… हिमता मचार को गिरफ्तार कर लिया गया… भाई की हत्या का आरोपी अब सलाखों के पीछे है…
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं है… यह उस सामाजिक सच्चाई का आईना है… जहां जमीन रिश्तों से बड़ी होती जा रही है… यह सवाल छोड़ जाता है कि क्या समय रहते बंटवारा हो जाता तो क्या एक भाई की जान बच सकती थी… क्या अब खून का रिश्ता भी खेत और कागज के आगे बौना पड़ गया है…
इस सनसनीखेज अंधे कत्ल के खुलासे में थाना राणापुर प्रभारी निरीक्षक श्री दिनेश रावत, उपनिरीक्षक श्री ब्रिजेन्द्र छाबरिया, सहायक उपनिरीक्षक श्री कड़ेबसिंह मेड़ा, प्रधान आरक्षक 244 श्री राजेन्द्र, आरक्षक 19 श्री दिनेश, आरक्षक 163 श्री विवेक कुमार एवं आरक्षक 607 श्री दिनेश भयडिया की अहम भूमिका रही… झाबुआ पुलिस की यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि कत्ल चाहे जितना भी चालाकी से किया जाए… कानून की पकड़ से बचना नामुमकिन है…




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