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टंट्या मामा की मूर्ति में महाघोटाला : कागजों में पत्थर–धातु, जमीन पर फाइबर - खरगोन नगर पालिका पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप....

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✍️ संवाददाता: खरगोन  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

09 जनवरी 2026

खरगोन

खरगोन (विशाल भमाेरिया)। बिष्टान रोड़ तिराहे पर टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना का मामला अब केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं रहा, बल्कि नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और नीयत पर बड़ा सवाल बन गया है। जिस मूर्ति को जनता के पैसे से पत्थर या धातु में स्थापित किया जाना था, वह फाइबर की निकली और इसी बिंदु पर पूरा मामला भारी भ्रष्टाचार की शक्ल अख्तियार कर गया है।

 

कांग्रेस का आरोप है कि नगर पालिका परिषद खरगोन की 24 सितंबर 2025 को हुई पीआईसी बैठक में स्पष्ट और लिखित निर्णय लिया गया था कि टंट्या मामा की मूर्ति संगमरमर पत्थर अथवा धातु की ही लगाई जाएगी। इस निर्णय के अनुरूप नगर पालिका ने आधिकारिक विज्ञप्ति भी जारी की, जिसमें साफ शब्दों में मूर्ति का प्रकार निर्धारित किया गया था।


इतना ही नहीं, कलेक्टर कार्यालय खरगोन ने भी नगर पालिका परिषद को पत्थर या धातु की मूर्ति लगाने के निर्देश जारी किए थे। यानी प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय तीनों स्तरों पर शर्तें तय थीं। बावजूद इसके, जब मूर्ति स्थापित की गई, तो वह न तो धातु की थी और न ही पत्थर की बल्कि फाइबर से बनी पाई गई।

 

नगर पालिका द्वारा पिनाक ट्रेडिंग कंपनी, खरगोन से 9 लाख 90 हजार रुपये की भारी भरकम राशि में टंट्या मामा की मूर्ति खरीदी गई। सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम के भुगतान से पहले क्या मूर्ति का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। और यदि हुआ, तो फिर यह तथ्य कैसे नजरअंदाज कर दिया गया कि मूर्ति निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।


जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रवि नाईक ने आरोप लगाया कि यह साधारण भूल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मूर्ति प्राप्त करते समय, उसे स्थापित करते समय और भुगतान प्रक्रिया के दौरान हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं। यह संकेत देता है कि मामला पूर्व नियोजित भ्रष्टाचार का है।


कांग्रेस का कहना है कि नगर पालिका परिषद ने न केवल अपने ही तय मापदंडों का उल्लंघन किया, बल्कि कलेक्टर कार्यालय के निर्देशों को भी खुलेआम रौंद दिया। यह कृत्य प्रथम दृष्टि में आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है और इसमें कई स्तरों पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

नगर पालिका परिषद खरगोन द्वारा जारी विज्ञप्ति और कलेक्टर कार्यालय के निर्देशों के बावजूद टंट्या मामा की फाइबर मूर्ति स्थापित की गई। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे आर्थिक अपराध बताया है।

मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होने और सवाल उठने के बावजूद अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह आशंका और गहरी होती जा रही है कि कहीं जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।


इसी मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल खरगोन कलेक्टर से मिला और पूरे मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यदि इस प्रकरण में दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात कर टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग की।

रवि नाईक ने चेतावनी देते हुए कहा कि टंट्या मामा जैसे जननायक की मूर्ति के साथ किया गया यह समझौता केवल सामग्री का नहीं, बल्कि जनभावनाओं और सार्वजनिक धन का अपमान है। दोषियों को बख्शा गया तो यह गलत परंपरा को बढ़ावा देगा।


प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस महासचिव जितेंद्र भावसार, जिला प्रवक्ता राजेश मंडलोई, युवा नेता सौरभ निखोरिया और मांगीलाल मोरे शामिल रहे


क्या टंट्या मामा की मूर्ति के नाम पर फाइबर का खेल खेलकर लाखों की रकम ठिकाने लगाई गई...? क्या जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा...? जवाब अब प्रशासन को देना है...

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