रतलाम ड्रग फैक्ट्री केस : सिस्टम के भीतर तक पहुंचा नशे का नेटवर्क... सस्पेंड SI की पहचान और फर्जी आर्मी कार्ड - रतलाम में सनसनी...
18 जनवरी 2026
रतलाम
सस्पेंड SI की आईडी, बेटे के नाम फर्जी आर्मी कार्ड और 10 करोड़ की MD के बाद पूरा दिलावर परिवार जेल में...
रतलाम (कृष्णपाल सिंह साेलंकी)। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में सामने आया एमडी ड्रग फैक्ट्री मामला अब सिर्फ नशे की तस्करी नहीं, बल्कि पुलिस संरक्षण, फर्जी पहचान, जमीन–पैसे का खेल और संगठित अपराध का खतरनाक चेहरा बनकर उभरा है। चिकलाना क्षेत्र में पकड़ी गई ड्रग फैक्ट्री की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे ऐसे खुलासे सामने आए, जिन्होंने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी दिलावर खान के ठिकानों से करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की एमडी ड्रग्स के अलावा ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनका आम नागरिक से कोई लेना-देना नहीं हो सकता। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि वहां से एक सस्पेंड सब-इंस्पेक्टर की पुलिस आईडी और वर्दी बरामद हुई, जिससे यह आशंका गहराती जा रही है कि ड्रग फैक्ट्री को कहीं न कहीं पुलिस तंत्र के भीतर से संरक्षण मिल रहा था।

मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस को तलाशी के दौरान दिलावर के बेटे के नाम से बना आर्मी आई-कार्ड भी मिला, जो प्रारंभिक जांच में फर्जी बताया जा रहा है। अब यह सवाल उठ रहा है कि फर्जी सैन्य पहचान का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था—सुरक्षा से बचने के लिए या फिर किसी बड़े नेटवर्क को ढाल देने के लिए।

ड्रग फैक्ट्री के खुलासे के बाद पुलिस की कार्रवाई में बड़ा कदम तब सामने आया, जब दिलावर खान की दोनों पत्नियां, बहन, बहू और बच्चे भी इस मामले में जेल पहुंच गए। पुलिस का मानना है कि ड्रग कारोबार केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि परिवारिक स्तर पर आर्थिक और लॉजिस्टिक सहयोग मिल रहा था। यही कारण है कि जांच एजेंसियों ने पूरे परिवार की भूमिका को रडार पर ले लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिशें भी हुईं। कथित तौर पर पुलिस को भारी रकम का प्रलोभन दिए जाने की बात सामने आई है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। इसके बावजूद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया।
तलाशी में मिले जमीनों के दस्तावेज इस केस को और गंभीर बनाते हैं। बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां और अनुबंध पत्र मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि ड्रग कारोबार से कमाई गई रकम को जमीनों और संपत्तियों में खपाया गया। अब इन सभी दस्तावेजों की वैधानिकता और धन के स्रोत की जांच की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। SIT ड्रग सप्लाई चेन, फर्जी पहचान पत्र, पुलिस कनेक्शन, आर्थिक लेन-देन और संभावित राजनीतिक रसूख—हर पहलू की परत-दर-परत जांच कर रही है। साइबर साक्ष्य और कॉल डिटेल्स भी जांच का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, रतलाम ड्रग फैक्ट्री केस अब प्रदेश के सबसे संवेदनशील मामलों में शुमार हो चुका है। यह मामला बताता है कि नशे का कारोबार किस तरह कानून, वर्दी और पहचान की आड़ लेकर फल-फूल सकता है। अब सबकी नजर SIT की जांच पर टिकी है, क्योंकि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की पूरी संभावना है।






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