शराब केस में बड़ा फैसला, अधिवक्ता योगेश खींची की पैरवी से मिली राहत...करोड़ों की शराब जब्ती केस पलटा, कोर्ट से मिला बड़ा आदेश...
15 मार्च 2026
धार
पहले ट्रकों की सुपुर्दगी, अब करोड़ों की शराब पर भी कोर्ट का आदेश
✍️ ऋतिक विश्वकर्मा | एमपी जनमत
धार। सादलपुर क्षेत्र में 5 जनवरी 2026 को पकड़ी गई करोड़ों रुपये की अवैध अंग्रेजी शराब के चर्चित मामले में अब एक और अहम कानूनी मोड़ सामने आया है। पहले जहां इस प्रकरण में जब्त वाहनों की सुपुर्दगी का आदेश हुआ था, वहीं अब माननीय न्यायालय ने जब्त शराब को भी विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत सुपुर्द करने का आदेश जारी किया है।
यह था पुरा मामला
सादलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने चेकिंग के दौरान दो आयशर वाहनों से भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की थी। कार्रवाई में कुल 1525 पेटियां अंग्रेजी शराब जब्त की गई थीं, जिसकी बाजार कीमत करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
पहले ट्रकों की मिली थी सुपुर्दगी
मामला न्यायालय पहुंचने पर वाहन स्वामी की ओर से अधिवक्ता योगेश खींची ने मजबूत कानूनी तर्कों के साथ वाहन सुपुर्दगी के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। केस डायरी और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने दोनों वाहनों को सुपुर्द करने का आदेश दिया था।
अब शराब सुपुर्द करने का आदेश
इसी प्रकरण में आगे की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता योगेश खींची द्वारा जब्त शराब को सुपुर्द करने के लिए भी आवेदन प्रस्तुत किया गया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, धार ने आदेश पारित करते हुए जब्त शराब की 1525 पेटियां जिसकी कीमत लगभग 2 कराेड़ रुपये से अधिक बताई गई है, उसे नियमानुसार सुपुर्द करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुपुर्दगी से पूर्व शराब का विधिवत पंचनामा और विवरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
बेहतर अधिवक्ता के रूप में उभरती पहचान
कानूनी क्षेत्र में अधिवक्ता योगेश खींची को एक सशक्त और बेहतर अधिवक्ता के रूप में देखा जा रहा है। हाल के समय में आबकारी से जुड़े कई मामलों में उनकी प्रभावी पैरवी चर्चा में रही है। सादलपुर के इस प्रकरण में पहले वाहनों की सुपुर्दगी और अब जब्त शराब की सुपुर्दगी का आदेश मिलना उनकी मजबूत कानूनी रणनीति और विधिक समझ को दर्शाता है।
यह मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालत में प्रस्तुत कानूनी तर्कों ने इसे नया आयाम दिया है। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद न्यायालय में हुई प्रभावी पैरवी ने यह भी दिखाया कि विधिक प्रक्रिया के माध्यम से अधिकारों की रक्षा किस प्रकार संभव होती है।





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