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किसान परिवार से आए कलेक्टर पर भरोसा… लेकिन सिस्टम बना रहा दीवार? पेटलावद SDM की कार्यशैली पर उठे सवाल

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✍️ संवाददाता: झाबुआ  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

16 अप्रैल 2026

झाबुआ

✍️ ऋतिक विश्वकर्मा | एमपी जनमत

झाबुआ। जिले के नवागत कलेक्टर से किसानों को बड़ी उम्मीदें हैं… वजह साफ है कि वे खुद एक किसान परिवार से आते हैं… ऐसे में किसानों का मानना है कि उनकी पीड़ा और परेशानियों को समझने में कलेक्टर साहब कहीं पीछे नहीं रहेंगे…

                  लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है… किसानों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि कलेक्टर और किसानों के बीच संवाद की जो मजबूत कड़ी बननी चाहिए… उसमें प्रशासन के कुछ अधिकारी ही बाधा बन रहे हैं… और यही कारण है कि किसानों की समस्याएं सही तरीके से शीर्ष स्तर तक नहीं पहुंच पा रही हैं…


पेटलावद एसडीएम की कार्यशैली पर भी अब सवाल उठने लगे हैं… किसानों का आरोप है कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा… जिससे असमंजस और असंतोष की स्थिति लगातार बढ़ रही है… यह स्थिति न केवल किसानों में नाराजगी पैदा कर रही है बल्कि कलेक्टर की छवि को भी प्रभावित कर रही है…


किसानों का साफ कहना है कि उन्हें कलेक्टर साहब से पूरी उम्मीद है… उनका मानना है कि यदि कलेक्टर सीधे संवाद स्थापित करें और जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति को समझें… तो समस्याओं का समाधान तेजी से संभव है… और प्रशासन में व्याप्त लापरवाही और तानाशाही रवैये पर भी लगाम लगाई जा सकती है…

अब समय आ गया है कि किसान हित में ठोस और बड़ा निर्णय लिया जाए… ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई हो जो भ्रम और दूरी पैदा कर रहे हैं… क्योंकि यदि कलेक्टर और किसान के बीच भरोसे की सीधी लाइन बन गई… तो न केवल व्यवस्था सुधरेगी बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा…

 

पेटलावद में किसानों का धरने पर बैठना कोई नया मामला नहीं है… यह वही जमीन है जहां पहले भी कई बार आंदोलन और विरोध की आवाजें उठ चुकी हैं… और हर बार एक ही सवाल खड़ा हुआ है… आखिर किसानों को बार-बार सड़क पर उतरने की नौबत क्यों आ रही है…


स्थानीय किसानों का कहना है कि पेटलावद प्रशासन की लापरवाही और समस्याओं को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति ही इन आंदोलनों की जड़ है… कई बार शिकायतें की गईं… कई बार समाधान की उम्मीद जताई गई… लेकिन जब स्थायी हल नहीं निकला तो किसानों को मजबूर होकर धरना और आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा…


किसानों के बीच यह भी चर्चा है कि जब तक प्रशासन में ऐसा जिम्मेदार मुखिया नहीं होगा जो उनकी बात को गंभीरता से समझे और समय पर समाधान दे… तब तक ऐसे हालात बार-बार बनते रहेंगे… और हर बार मामला किसी न किसी रूप में तूल पकड़ता रहेगा…


पेटलावद बेल्ट को उन्नत खेती और जागरूक किसानों के लिए जाना जाता है… यहां के किसान न केवल आधुनिक तकनीक अपनाते हैं बल्कि अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर भी सजग रहते हैं… लेकिन यही किसान जब बार-बार परेशान होकर सड़क पर उतरने को मजबूर हों… तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है…

              अब जरूरत इस बात की है कि केवल तात्कालिक समाधान नहीं… बल्कि स्थायी और ठोस निर्णय लिए जाएं… ताकि किसानों को बार-बार आंदोलन का सहारा न लेना पड़े… और प्रशासन व किसान के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी बन सके…

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