प्रेम की सजा मौत... प्रेमी को जंगल में बांधा... लट्ठ-पत्थरों से पीटा... फिर रेलवे हादसा बताने की रची साजिश...
30 मई 2026
झाबुआ
✍️ ऋतिक विश्वकर्मा | एमपी जनमत
झाबुआ। प्रेम कब अपराध बन जाता है... और कब इंसान को हैवान बना देता है... इसका भयावह उदाहरण झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र में सामने आया है... यहां एक युवक का कसूर सिर्फ इतना था कि वह एक युवती से प्रेम करता था... लेकिन यह प्रेम युवती के परिजनों को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने कानून को अपने हाथ में ले लिया... और प्रेमी की सांसें ही छीन लीं...

यह कहानी है पिपलीपाड़ा निवासी 20 वर्षीय सुकराम निनामा की... जो बेहतर भविष्य और प्रेम के सपने देख रहा था... लेकिन उसे क्या मालूम था कि उसके प्रेम की मंजिल मौत बनकर उसका इंतजार कर रही है...
पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है... वह किसी अपराध कथा से कम नहीं है... बताया जाता है कि सुकराम का ग्राम सातेर की एक युवती से पिछले तीन महीनों से प्रेम संबंध था... दोनों मजदूरी के दौरान एक-दूसरे के करीब आए थे... प्रेम परवान चढ़ा तो मुलाकातों का सिलसिला भी शुरू हो गया...
23 मई की रात सुकराम अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचा... लेकिन प्रेम की यह मुलाकात कुछ लोगों की आंखों में कांटे की तरह चुभ गई... युवती के कजिन भाई देवीलाल सिंगाड और कालु सिंगाड इस रिश्ते से बुरी तरह नाराज थे... उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर ऐसा फैसला किया जिसने एक परिवार का चिराग बुझा दिया...
आरोपियों ने सुकराम को बामनिया रेलवे स्टेशन के पास सोते हुए पाया... उसे जबरन जंगल में ले जाया गया... उसके हाथ गमछे से पेड़ से बांध दिए गए... और फिर शुरू हुआ बर्बरता का वह खेल... जिसे सुनकर भी रूह कांप जाए... लट्ठों और पत्थरों से उसकी पीठ और शरीर पर तब तक वार किए गए... जब तक उसकी सांसें थम नहीं गईं...
हत्या के बाद भी आरोपियों का दिल नहीं भरा... उन्होंने अपनी करतूत छिपाने के लिए शव को मोटरसाइकिल पर रखा... रेलवे स्टेशन के पास लाकर फेंक दिया... ताकि पुलिस इसे रेल दुर्घटना समझकर फाइल बंद कर दे... लेकिन अपराधी अक्सर एक गलती कर बैठते हैं... और वही गलती यहां भी हुई...
पेटलावद पुलिस ने घटनास्थल पर मिले संकेतों को गंभीरता से लिया... शव पर मौजूद चोटों ने पूरी कहानी बदल दी... पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों... मुखबिर तंत्र और सूक्ष्म जांच के सहारे उस साजिश की परतें खोल दीं... जिसे आरोपी बेहद चालाकी से छिपाना चाहते थे...
आखिरकार 29 मई को पुलिस ने देवीलाल सिंगाड और कालु सिंगाड को गिरफ्तार कर लिया... पूछताछ में दोनों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया... जबकि उनके अन्य साथियों की तलाश अब भी जारी है...
झाबुआ जिले की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है... यह उस मानसिकता का भी आईना है... जिसमें कुछ लोग आज भी प्रेम को अपनी झूठी प्रतिष्ठा के खिलाफ मानते हैं... और अदालत की जगह खुद फैसला सुनाने लगते हैं... लेकिन याद रखना चाहिए... प्रेम करना अपराध नहीं है... हत्या करना अपराध है... और कानून के हाथ देर से सही... लेकिन अपराधियों के गिरेबान तक जरूर पहुंचते हैं...
हम फिर मिलेंगे अगली क्राइम स्टोरी के साथ आप देखते रहें एमपी जनमत... हमारे यूट्यूब चैनल को लाइक और सब्स्क्राइब करना ना भूले और हमारी वेबसाइट www.mpjamat.com पर खबरे पड़ना ना भूले...





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