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मेडिकेयर हॉस्पिटल पर मेहरबान नगर निगम... 3 मंजिला अवैध निर्माण पर 4 महीने बाद भी नहीं चली कार्रवाई...

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✍️ संवाददाता: इंदौर  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

1 मई 2026

इंदौर

✍️ अरविन्द आर. तिवारी | एमपी जनमत

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5 फरवरी को जारी हुआ था अंतिम आदेश, बेसमेंट में अवैध ऑफिस और तीन अतिरिक्त मंजिलों पर अब तक निगम की चुप्पी सवालों के घेरे में...

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इंदौर। नगर निगम की कार्रवाई पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। गरीबों और छोटे व्यापारियों के निर्माण पर तत्काल बुलडोजर चलाने वाला निगम प्रशासन शहर के एक बड़े निजी अस्पताल के सामने बेबस नजर आ रहा है। मामला ओल्ड पलासिया स्थित मेडिकेयर हॉस्पिटल का है, जहां कथित रूप से बेसमेंट और अतिरिक्त मंजिलों के अवैध निर्माण के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

                  प्रमाणित दस्तावेज की जानकारी के अनुसार झोन क्रमांक-10 के ठीक सामने स्थित मेडिकेयर हॉस्पिटल को स्वीकृत नक्शे के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग के लिए करना था, लेकिन आरोप है कि वहां कार्यालय और अन्य निर्माण कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर में वाहनों की पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण मरीजों और स्टाफ के वाहन सड़क तथा फुटपाथ तक पहुंच रहे हैं।

 

सूत्रों के अनुसार अस्पताल को तीन मंजिल तक निर्माण की स्वीकृति प्राप्त थी, लेकिन मौके पर छह मंजिल तक निर्माण किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इस संबंध में नगर निगम द्वारा कई बार नोटिस जारी किए गए और अंततः 5 फरवरी को अवैध निर्माण हटाने का अंतिम आदेश भी जारी किया गया था। बावजूद इसके लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि यही निर्माण किसी सामान्य नागरिक या गरीब परिवार द्वारा किया गया होता तो अब तक निगम का बुलडोजर पहुंच चुका होता। लेकिन प्रभावशाली लोगों से जुड़े इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई लगातार टलती जा रही है।

 

अस्पताल के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने आसपास की कुछ मल्टियों में फ्लैट खरीदकर वहां वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। नतीजतन सड़कों और फुटपाथों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है, जिससे स्थानीय रहवासी परेशान हैं।

 

मामले में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। बिल्डिंग परमिशन शाखा के अपर आयुक्त प्रखर सिंह, झोन-10 के बीओ राहुल सूर्यवंशी तथा बीआई जोशना उबनारे को फोन किए गए, लेकिन किसी ने भी प्रतिक्रिया देना उचित नहीं समझा।

                   अब बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम द्वारा जारी अंतिम आदेश केवल औपचारिकता था या फिर वास्तव में अवैध निर्माण के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी? शहर में यह चर्चा तेज है कि आखिर ऐसा कौन सा दबाव या रसूख है जिसके आगे निगम प्रशासन भी कार्रवाई करने से बच रहा है। 

 

एमपी जनमत इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाता रहा है और तब तक उठाता रहेगा, जब तक मेडिकेयर हॉस्पिटल के कथित अवैध निर्माण पर नगर निगम की कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं देती। जनहित के इस सवाल पर हमारी कलम नहीं रुकेगी, जब तक खबर का असर पूर्ण रूप से सामने नहीं आता।

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