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झाबुआ में सरिया कारोबार का ‘बिना जीएसटी रैकेट…' पुलिस–सेल टैक्स दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पीछे हटे...

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✍️ संवाददाता: झाबुआ  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

23 नवम्बर 2025

झाबुआ

झाबुआ (ऋतिक विश्वकर्मा)। जिले में बिना जीएसटी और बिना बिल के सरियों का बड़े पैमाने पर खेल चल रहा है। स्थिति यह है कि इंदौर, पीथमपुर और जालना महाराष्ट्र से अधिकांशत: सरियों से भरे ट्रक झाबुआ पहुंचते हैं, लेकिन किसके संरक्षण में यह पूरा रैकेट फल-फूल रहा है, यह साफ तौर पर कहना मुश्किल है। स्थानीय व्यापारी भी आफ रिकॉर्ड यह मान रहे हैं कि “कुछ बड़े हाथ” इस पूरे काम को सुरक्षा दे रहे हैं।

पुलिस की भूमिका संदिग्ध… ‘सेल टैक्स देखेगा’ कहकर पल्ला झाड़ा जब सरियों से भरे ट्रकों की सूचना पुलिस तक पहुंचती है, तो स्थानीय पुलिस कार्रवाई करने से पीछे हट जाती है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा मामला कर-विभाग यानी सेल्स टैक्स से संबंधित है। हमने जब काेतवाली पर सूचना दी ताे काेतवाली थाना प्रभारी ने साफ कहा - “यह कार्यवाही सेल टैक्स विभाग करता है, हमारा इसमें पावर नहीं है...”

सेल्स टैक्स का जवाब... ‘पहले पुलिस वाहन खड़ा करवाए और लेटर जारी करे’ दूसरी तरफ, जब मामला सेल्स टैक्स विभाग तक पहुँचा तो विभाग अधिकारियों ने भी अपनी असमर्थता जताई। उनका कहना रहा कि - “हमारे पास ट्रकों को रोकने की पावर नहीं है। पहले पुलिस वाहन को खड़ा करवाए, कार्रवाई का लेटर जारी करे, तभी हम आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। ऊपर से अनुमति लेनी पड़ती है...”

यानी दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पीछे हट जाते है… और इस बीच बिना जीएसटी, बिना बिल के सरिया धड़ल्ले से झाबुआ में उतर जाता है।

करोड़ों का राजस्व नुकसान, लेकिन रैकेट पर कार्रवाई ‘शून्य’
इस तरह के अवैध व्यापार से सरकार को हर महीने लाखों–करोड़ों का टैक्स नुकसान हो रहा है। झाबुआ जिले में निर्माण कार्य और निजी ठेके का बाजार बड़ा है... इसी का लाभ उठाकर बिना बिल का माल बेतहाशा खपाया जा रहा है। सवाल यह भी है कि आखिर यह खेल बिना राजनीतिक, प्रशासनिक या विभागीय संरक्षण के संभव कैसे है...?

इस संबंध में मन उठते प्रश्न...

किसके संरक्षण में ट्रक बेरोकटोक झाबुआ में उतरते हैं...?

पुलिस और सेल टैक्स विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे है...?

क्या यह बड़े स्तर का टैक्स चोरी रैकेट है...?

इन सभी सवालों का जवाब अब तक नहीं मिला है। लेकिन झाबुआ में सरियों का अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है और विभागों की चुप्पी कई गंभीर संकेत दे रही है।

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