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झाबुआ में लोकायुक्त की दस्तक ... जनजातीय विभाग का लेखापाल अमलियार रिश्वत लेते पकड़ाया... प्रणाली की बीमारी फिर उजागर...

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✍️ संवाददाता: झाबुआ  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

11 दिसंबर 2025

झाबुआ

झाबुआ। 11 दिसंबर काे गुरुवार की सुबह जैसे ही लोकायुक्त की टीम सक्रिय हुई... वैसे ही यह साफ हो गया कि सरकारी तंत्र की परतों में छिपी धूल एक बार फिर झाड़ दी जाएगी... जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ लेखपाल जामसिंह अमलियार पर आरोप था कि वह लंबित विभागीय जांच को दफनाने की कीमत तय कर चुका था... कीमत भी मामूली नहीं... पूरे पचास हजार रुपए और यह राशि किसी सुविधा शुल्क की तरह नहीं... बल्कि एक मजबूर आवेदक की विवशता की तरह मांगी गई थी...

 

शांति लाल नामक आवेदक ने जब यह बात लोकायुक्त तक पहुंचाई... तब व्यवस्था के भीतर छिपा अंधेरा अचानक उजाले में खड़ा हो गया... योजना बनी... जाल बिछा और गुरुवार को ठीक उसी क्षण... जब जामसिंह अमलियार ने पहली किस्त के रूप में 14 हजार 500 रुपए हाथ में लिए... लोकायुक्त ने उसके हाथों को वहीं रोक दिया... वही नोट... वही क्षण... वही सच... जिसने पूरे मामले को निर्वस्त्र कर दिया...

 

अब कार्रवाई झाबुआ के डाक बंगले में आगे बढ़ रही है... जहां दस्तावेजाें की परतें खुल रही है... सवालों की रफ्तार बढ़ रही है और आरोपी के पास उत्तर कम एवं बहाने अधिक है... लोकायुक्त की ओर से कहा गया है कि विस्तृत जानकारी शीघ्र ही औपचारिक रूप से साझा की जाएगी...

यह घटना फिर याद दिलाती है कि रिश्वत की यह बीमारी सिर्फ जेबों पर नहीं... व्यवस्था की आत्मा पर भी प्रहार करती है और हर बार जब कोई अधिकारी रंगे हाथ पकड़ा जाता है... जनता का विश्वास थोड़ा और मजबूत होता है... कि व्यवस्था में अभी भी कुछ हाथ ऐसे है जो साफ रहना जानते है...

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